देशभर में बदलेगा मौसम का मिजाज, मानसून की दस्तक के साथ कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना
मानसून की प्रगति ने बढ़ाई उम्मीदें
देशभर के किसानों के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों के दौरान मानसून केरल, लक्षद्वीप, तमिलनाडु और अरब सागर के कुछ अन्य क्षेत्रों में और आगे बढ़ सकता है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं कई क्षेत्रों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा भी बना हुआ है।
देशभर में सक्रिय हैं कई मौसमी सिस्टम
मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान समय में कई मौसमी प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में नमी की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण और वायुमंडलीय अस्थिरता बनी हुई है। इन परिस्थितियों के कारण देश के अनेक राज्यों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। कई इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
पूर्वोत्तर भारत में लगातार बारिश का दौर
पूर्वोत्तर भारत में अगले सात दिनों तक मौसम सक्रिय बना रहने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक स्तर पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने अरुणाचल प्रदेश में 4 जून तथा 6 से 9 जून के बीच भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं असम और मेघालय में 4 से 7 जून तक भारी वर्षा और 8 से 9 जून के दौरान कुछ स्थानों पर बहुत भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
दक्षिण भारत में मानसून का बढ़ता प्रभाव
दक्षिण भारत के राज्यों में मानसून की गतिविधियां लगातार मजबूत हो रही हैं। केरल, माहे, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और लक्षद्वीप में अगले कुछ दिनों तक व्यापक बारिश होने की संभावना है। कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। केरल और माहे में 4 से 9 जून के बीच कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी
पूर्वी भारत के राज्यों में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार, झारखंड और ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।
उत्तर-पश्चिम भारत में आंधी और ओलावृष्टि का खतरा
उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
मध्य भारत में गरज-चमक के साथ बारिश
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में भी मौसम विभाग ने बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में ओलावृष्टि की आशंका व्यक्त की गई है। इससे खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
पश्चिम भारत में भारी बारिश की संभावना
कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। कोंकण और गोवा में कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की जा सकती है, जिससे जल स्रोतों और जलाशयों को लाभ मिलेगा।
तापमान में होगा उतार-चढ़ाव
4 से 6 जून के दौरान देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके बाद 7 से 9 जून के बीच तापमान में फिर से वृद्धि होने की संभावना है। इससे किसानों को मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनानी होगी।
हीट वेव और उमस भरे मौसम की चेतावनी
बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में लू चलने की संभावना बनी हुई है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों और ओडिशा में उमस भरा मौसम लोगों को परेशान कर सकता है।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मौसम विभाग के अपडेट पर लगातार नजर रखें। जहां भारी बारिश की संभावना है वहां खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें। कटाई की गई फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखें और कृषि यंत्रों को भी बारिश से बचाएं। खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसान मौसम की स्थिति के अनुसार अपनी रणनीति बनाएं।
मानसून 2026 देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हो रहा है। यह किसानों के लिए अच्छी बारिश की उम्मीद लेकर आया है, लेकिन कई क्षेत्रों में भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में सतर्कता और समय पर तैयारी ही किसानों को नुकसान से बचा सकती है।
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